1
00:00:23,100 --> 00:00:35,300
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि 
। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

2
00:00:35,400 --> 00:00:47,100
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार बल 
बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार

3
00:00:47,200 --> 00:00:53,200
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीस तिहुँ लोक 
उजागर॥१॥

4
00:00:53,300 --> 00:00:58,500
राम दूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवनसुत 
नामा॥२॥

5
00:00:58,600 --> 00:01:04,100
महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के 
संगी॥३॥

6
00:01:04,200 --> 00:01:10,300
कंचन बरन बिराज सुबेसा कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥

7
00:01:10,400 --> 00:01:16,300
हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे काँधे मूँज जनेऊ 
साजे॥५॥

8
00:01:16,400 --> 00:01:21,600
शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥

9
00:01:21,700 --> 00:01:27,200
विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को 
आतुर॥७॥

10
00:01:27,300 --> 00:01:33,200
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया राम लखन सीता 
मनबसिया॥८॥

11
00:01:33,300 --> 00:01:39,100
सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा विकट रूप धरि 
लंक जरावा॥९॥

12
00:01:39,200 --> 00:01:44,800
भीम रूप धरि असुर सँहारे रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥

13
00:01:44,900 --> 00:01:49,700
लाय सजीवन लखन जियाए श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥

14
00:01:49,800 --> 00:01:56,000
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत-हि 
सम भाई॥१२॥

15
00:01:56,100 --> 00:02:02,100
सहस बदन तुम्हरो जस गावै अस कहि श्रीपति कंठ 
लगावै॥१३॥

16
00:02:02,200 --> 00:02:07,500
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥

17
00:02:07,600 --> 00:02:13,500
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते कवि कोविद कहि सके 
कहाँ ते॥१५॥

18
00:02:13,600 --> 00:02:18,400
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा राम मिलाय राज 
पद दीन्हा॥१६॥

19
00:02:18,500 --> 00:02:24,000
तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना लंकेश्वर भये सब 
जग जाना॥१७॥

20
00:02:24,100 --> 00:02:29,500
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू लिल्यो ताहि मधुर 
फ़ल जानू॥१८॥

21
00:02:29,600 --> 00:02:35,900
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही जलधि लाँघि गए 
अचरज नाही॥१९॥

22
00:02:36,000 --> 00:02:40,800
दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे 
तेते॥२०॥

23
00:02:40,900 --> 00:02:47,200
राम दुआरे तुम रखवारे होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥

24
00:02:47,300 --> 00:02:52,800
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहु 
को डरना॥२२॥

25
00:02:52,900 --> 00:02:58,000
आपन तेज सम्हारो आपै तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥

26
00:02:58,100 --> 00:03:03,400
भूत पिशाच निकट नहि आवै महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥

27
00:03:03,500 --> 00:03:09,000
नासै रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥

28
00:03:09,100 --> 00:03:14,800
संकट तै हनुमान छुडावै मन क्रम वचन ध्यान जो 
लावै॥२६॥

29
00:03:14,900 --> 00:03:20,000
सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥

30
00:03:20,100 --> 00:03:25,200
और मनोरथ जो कोई लावै सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥

31
00:03:25,300 --> 00:03:31,000
चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥

32
00:03:31,100 --> 00:03:36,900
साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥

33
00:03:37,000 --> 00:03:42,000
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी 
माता॥३१॥

34
00:03:42,100 --> 00:03:47,400
राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के 
दासा॥३२॥

35
00:03:47,500 --> 00:03:53,300
तुम्हरे भजन राम को पावै जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥

36
00:03:53,400 --> 00:03:58,600
अंतकाल रघुवरपुर जाई जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥

37
00:03:58,700 --> 00:04:04,200
और देवता चित्त ना धरई हनुमत सेई सर्व सुख 
करई॥३५॥

38
00:04:04,300 --> 00:04:09,900
संकट कटै मिटै सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥

39
00:04:10,000 --> 00:04:15,600
जै जै जै हनुमान गुसाईँ कृपा करहु गुरु देव 
की नाई॥३७॥

40
00:04:15,700 --> 00:04:21,200
जो सत बार पाठ कर कोई छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥

41
00:04:21,300 --> 00:04:26,300
जो यह पढ़े हनुमान चालीसा होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥

42
00:04:26,400 --> 00:04:31,600
तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥

43
00:04:31,700 --> 00:04:42,600
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन 
सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

